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सवर्ण आरक्षण नहले पर दहला: मोदी  

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सवर्ण आरक्षण नहले पर दहला: मोदी  

 

भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा के चुनाव में पांच राज्यों के चुनाव की विफलता ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी के नेतृत्व पर सवालिया निशान खड़ा किया जा रहा था | राफेल के मुद्दे पर रोज तीखी बहस हो रही थी विपक्ष का हमला पुरजोर तरीके से किया जा रहा था | सभी विपक्षी दलों की रणनीति ये रही की राफेल बनाम बफोर्ष का रूप दिया जाये ये कोशिश रही |  राफेल  मुद्दे को भ्रस्ट्राचार की कालिख भाजपा के दामन  पर ऐसा  रंग दिया जाये की भ्रष्टाचार के रंग से भारतीय जनता पार्टी दागदार हो जाये |

विपक्ष ने राफेल के नाम पर पुरजोर कोशिश कर रही है | जब भाजपा सरकार के दामन पर कही कोई दाग के निशान ही नही तो कोई कैसे कालिख लगा सकता हैं | संसद में राफेल को लेकर विपक्ष ने हर तरह से प्रयाश किया गया लेकिन दूर के सपने सुहावने वाली मुहावरा ही साबित हो पा रही थी | पक्ष और विपक्ष के इस खेल में नरेंद्र मोदी खामोश रहें और मुस्कुराते रहें ख़ामोश ही रहें  इस ख़ामोशी को विपक्ष हारे हुए खिलाडी के रूप में नरेंद्र  मोदी को देख रहा हैं |

भाजपा के पांच राज्यों के हार ने माननीय नरेंद्र मोदी को  मंथन करने के लिए मजबूर किया और उसे जो अमृत छलका हैं उससे  विपक्ष के कुछ सूझ नहीं रहा हैं इस ब्रह्मास्त्र का कोई तोड़ है भी की नहीं ? क्या हैं ये ब्रहास्त्र स्वर्ण आरक्षण नहले पर दहला साबित हुआ | विपक्ष  को  दिन जागते में नीद उड़ गयी हैं | जातिगत राजनीति ने सभी को तिलमिला दिया हैं इसे कहते हैं दिन में तारे दिखना ?

नरेंद्र मोदी के साथ – साथ चलने वाली पार्टियों के मन को उनकी ये ही दूर दर्सिता मन छु लेती हैं  | ये पार्टियाँ मजबूती से भारतीय जनता पार्टी के साथ खड़ीं  दिखाई देती हैं | भाजपा के राज्यसभा में हार कीमत क्यों चुकानी पड़ी | नारजगी के असल मुद्दे क्या रहे यदि  इन मुद्दों को को ही जड़ से खत्म कर दिया जाये तो लोकसभा का चुनाव दिलचस्प हो जायेगा |

लेकिन ये बड़ी सोचनीय बात थी की इन मुद्दों को  राज्यसभा के चुनाव में क्यों नहीं उठाया गया |  या इन मुद्दों पर क्यों नहीं चुनाव लड़ा गया | ये सवाल सभी जनता पक्ष और विपक्ष के मन में  प्रश्न की तरह उठ रहा होगा | ये ही तो राजनीति के खेल के  नियम हैं छोटी सी जीत  के लिए  ब्रह्मास्त्र का उपयोग नहीं करते इनका सदुपयोग बड़ी जीत के लिय किया जाता हैं इस ब्रह्मास्त्र को नरेंद्र मोदी ने लोक सभा के चुनाव के लिए अपनी इस तीर को अपने तकस में सम्हाल कर रखा था |

स्वर्ण जातियों को आरक्षण देंने  के फैसले से देश के अलग-अलग राज्यों में चले तीन जातीय आन्दोलन का तात्कालिक हवा निकल जाएगी जैसे गुजरात में पाटीदार आन्दोलन ,मराठा और हरियाणा में जाट आन्दोलन ने भाजपा सरकार के लिए सरदर्द बना रहा और मुश्किल भी खड़ीं कर रहा था | उसका कोई तोड़ नज़र नहीं आ रहा था इन तीन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार हैं इन राज्यों से लोकसभा के चुनाव का परिणाम बेहतरीन होना जरुरी था |

ये मास्टर स्ट्रोक ब्रह्मास्त्र स्वर्ण आरक्षण ने लोकसभा के चुनाव में सरगर्मी बढ़ाने का काम करेगी | भाजपा को अच्छी  तरह पता हैं उसके खाते में सवर्णों का वोट का एकाधिकार हैं  लेकिन राज्यभा के चुनावी हार में नोटा में जितने  वोट मिले ये ही वोट भाजपा को मिल जाता तो भाजपा को हार का मुख नहीं देखना होता नोटा के वोट की गिनती सवर्ण की नारजगी रही |

आज़ादी के बाद से समय समय पर आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग होती रही लेकिन कभी भी सवर्ण को आरक्षण देने के लिए कोई भी पार्टी एक कदम भी बढ़ना नहीं चाहती थी कोई भी पार्टी आरक्षण का कार्ड खेलना नहीं चाहती रही लेकिन इस पेचिंदे से पेंच में हाथ कोई डालना नहीं चाहता था | आरक्षण की गणित में आरक्षण की सीमा 49.5 फिसिदी से बढाकर 59.5 फिसिदी करने से किसी से कुछ छीना नहीं जा रहा है इसीलिए दलितों आदिवासियों और पिछड़ों में अगड़ों को मिलने वाले आरक्षण  से कोई नारजगी नहीं होगी |

साथ ही साथ सवर्णों के आर्थिक  स्तिथि पर वर्षों की नारजगी भी दूर हो जाएगी | देश भी घुटन महसूस कर रहा था सिर्फ जाति के कारण उसकी गरीबी उसके लिए अभिशाप बन गयी थी अब उस गरीबी  के घर से बाहर निकलने  की राह आसन हो जाएगी | सवर्णों के इस दर्द पर  मोदी सरकार  ने मरहम लगाने की जो पहल की हैं वो इस सदी की सबसे बड़ी चुनौती रही हैं उसे निजात मिल जाएगी जो समाज में इस नाम से ज़हर घुल रहा था उस ज़हर के घड़े  में अमृत भर जायेगा  |

भाजपा सरकार ने चुनाव के नजरिये से सवर्ण आरक्षण लोकसभा के लिए मास्टर स्ट्रोक रहेगा | लेकिन इतनी आसन भी नहीं हैं देश की संसद में मंगलवार को पेश होने वाले संविधान संशोधन विधयेक के जरिये ही इस सवर्ण आरक्षण को क़ानूनी मान्यता मिलेगी | इस ब्रहास्त्र ने विपक्षी पार्टियों को सदमे में डाल दिया हैं ये ऐसा नाग मंडल जो सभी के गले में एक साथ फास बन गया हैं  |

इस विधेयक के विरोध से सभी पार्टियों की मानसिकता पता चलेगी और ये भी पता चलेगा की सवर्णों के लिए इनके दिल दिमाग में कितना ज़हर हैं | कुछ पार्टियाँ इस ब्रहास्त्र से तिलमिला गयी हैं  उनके  वक्तव्य भी आने सुरु  हो गए हैं |

राजनीति में कब क्या चाल चली जाती हैं कोई नहीं जानता लेकिन एक सच्चाई हैं जनता का ही फायदा होता हैं राजनीतज्ञोंके  विचारों से पार्टी तो चल सकती हैं लेकिन देश को चलाने  के समता समानता समरसता  होना जरुरी होता हैं जो माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के क्रिया कलापों में निष्पक्ष भाव से दिखाई देता हैं |

 

लेखक : साहिल बी श्रीवास्तव ( फिल्म लेखक –निर्देशक  की कलम )

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