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UGC ने PHD डिग्री के लिए नियमों में किया बड़ा बदलाव, अब अधिक सीटों में होंगे दाखिले



विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने रिसर्च PHD करवाने के अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PHD) डिग्री पर नए नियमों की घोषणा की है। कहा जा रहा है कि नए नियमों के आधार पर अब पीएचडी की अधिक सीटों में दाखिले होंगे। आगे चलकर ये बदलाव देश की बड़ी सफलता के रूप में जाने जाएंगे।

नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विनियम, 2022″ के तहत नए नियम अब 2016 में अधिसूचित नियमों की जगह लेंगे। नए नियमों के तहत, यूजीसी ने इनकी एक श्रृंखला तैयार की है जिसमें पात्रता आवश्यकताओं, प्रवेश प्रक्रिया और मूल्यांकन पद्धतियों में महत्वपूर्ण संशोधनों के बारे में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में डॉक्टरेट कार्यक्रमों के संचालन से संबंधित नियमों की विस्तार से जानकारी दी गई है। अधिसूचना के अनुसार ये सभी नियम तत्काल प्रभाव से लागू होते हैं।

PHD अध्ययन के लिए ये हैं नए नियम

– जिन छात्रों ने 4 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है, वे अब से डॉक्टरेट प्रोग्राम यानि PHD में सीधे प्रवेश पाने के पात्र होंगे।
– जहां ग्रेडिंग सिस्टम का पालन किया जाता है वहां स्केलिंग में उम्मीदवार के पास न्यूनतम 75% अंक होने चाहिए।
– यदि उम्मीदवार के चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम में 75% अंक नहीं हैं, तो उसे एक साल का मास्टर प्रोग्राम करना होगा और कम से कम 55% स्कोर करना होगा।
– नए नियम M.phil कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद कर देंगे।
– विश्वविद्यालय और कॉलेज NET/JRF के माध्यम से छात्रों को योग्यता के साथ-साथ संस्थानों के स्तर पर प्रवेश परीक्षा देने के लिए स्वतंत्र बनाएंगे।
– यदि कोई व्यक्तिगत संस्थान छात्रों को प्रवेश देने के लिए अपनी प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है, तो उम्मीदवारों को चाहिए कि वो नेट या इसी तरह की परीक्षा न दे। “प्रवेश परीक्षा में 50% शोध पद्धति शामिल होगी” और 50 प्रतिशत विषय विशिष्ट”।
– जहां चयन व्यक्तिगत विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षाओं द्वारा किया जाएगा, वहां 70% का वेटेज लिखित परीक्षा में प्रदर्शन के लिए और 30% साक्षात्कार के लिए दिया जाएगा।
– अब सहकर्मी-समीक्षित प्रकाशनों में शोध लेखों को प्रकाशित करने या प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी।
– कामकाजी पेशेवर अब अंशकालिक PHD कार्यक्रमों में नामांकन कर सकेंगे। इसके लिए उम्मीदवार जहां कार्यरत है वहां से किसी उपयुक्त अधिकारी द्वारा जारी आपत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त कर संस्थान में जमा कराएगा। NOC में स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए कि उम्मीदवार को अंशकालिक आधार पर पढ़ाई करने की अनुमति है।
– नई EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) श्रेणी के लिए प्रवेश आवश्यकताओं में 5% की रियायत दी गई है।
– वहीं UGC ने पीएचडी स्कॉलरों के लिए एक नई रिक्वायरमेंट और शुरू की है। चाहे वे किसी भी विषय के हों, शिक्षण/शिक्षण में प्रशिक्षण के लिए डॉक्टरेट की अवधि के दौरान अपने चुने हुए विषय से संबंधित शिक्षा/शिक्षाशास्त्र/लेखन आदि के लिए, अब स्कोलर PHD कर सकते हैं।
– अब सहकर्मी-समीक्षित प्रकाशनों में शोध लेखों को प्रकाशित करने या प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी।

अब अधिक सीटों में PHD के दाखिले होंगे

उल्लेखनीय है कि नए नियमों के तहत अब ज्वाइनिंग के बाद से ही प्रोफेसर छात्रों को PHD का अध्ययन करा सकेंगे। इसके अलावा अब प्रोफेसर को गाइड (Guide) बनने के लिए 5 साल का इंतजार भी नहीं करना होगा। पहले प्रोफेसर को गाइड बनने के लिए कई नियमों की सख्ती से भी गुजरना पड़ता था। लेकिन अब यूजीसी के नियमों में फेरबदल करने से सैंकड़ों छात्रों को बिना गाईड पीएचडी अनुसंधान से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। बल्कि अब अधिक सीटों में पीएचडी के दाखिले हो सकेंगे।

अब देश के विकास में अपने शोध का दे पाएंगे योगदान

नियमों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने राजपत्र (गैजेट नोटिफिकेशन) में पांच साल का टीचिंग/रिसर्च अनुभव की शर्त को भी हटा दिया है। इससे सारे देश के नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर को देश के विकास में अपने शोध का योगदान देने का अवसर मिलेगा। इस फैसले से अब युवा शिक्षक और रिसर्चरों को काफी राहत मिलेगी। दरअसल, पहले के नियमों के आधार पर उन्हें रिसर्च से दूर रखा जाता था, और इससे सारे देश के नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर प्रभावित होते थे।

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