रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2018-19 का छठा द्विमासिक पॉलिसी स्टेटमेंट जारी किया है। यह स्टेटमेंट मंगलवार से गुरुवार तक चली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद जारी किया गया हैं। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में तीन तक चली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के बाद रेपो रेट में 0.25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है। अब रेपो रेट 6.25 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट 6 फीसदी हो गया है।
आरबीआई ने पहली मौद्रिक समीक्षा नीति का एलान करते हुए देश की जनता को बड़ा तोहफा दिया है। आम जनता को अंतरिम बजट पेश होने के बाद आरबीआई ने बड़ी घोषणा देकर राहत दी है।
कर्ज लेना होगा सस्ता
आरबीआई के इस कदम से आम जनता को लोन लेना सस्ता पड़ेगा। इससे सभी तरह के लोन लेना शामिल हैं। 28 जनवरी को सरकारी बैंकों के साथ बैठक में शक्तिकांत दास ने इस बात के संकेत दिए थे।
बैंकों को पीसीए से निकालना प्राथकिता
एनपीए के बोझ तले दबे सरकारी बैंकों पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। आरबीआई ने 11 सरकारी बैंकों को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के तहत रखा था जिन पर नए लोन बांटने और शाखाएं खोलने पर रोक लगा दी गई थी।
देश में महंगाई पर मिली राहत
थोक और महंगाई के हालिया आंकड़े देखने के बाद एमपीसी अपने रुख में बदलाव कर सकती है। खुदरा महंगाई दिसंबर में 18 माह के निचले स्तर 2.19 प्रतिशत और थोक महंगाई आठ माह के निचले स्तर 3.80 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
खुदरा लोन बढऩे से मजबूत होगी अथज़्व्यवस्था
देश के अधिकतर सरकारी बैंकों पर बढ़ते एनपीए के बोझ और बैड लोन के कारण बैंकिंग तंत्र काफी समय से मुश्किल में है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दर में गिरावट से खुदरा लोन लेना सस्ता हो जाएगा और इसमें इजाफे से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है।
बैंकों का बढ़ रहा भरोसा
औद्योगिक और कारोबारी लोन के बड़ी मात्रा में एनपीए होने के कारण बैंकों का रुझान खुदरा कर्ज देने की ओर बढ़ रहा है।
आधे से ज्यादा खुदरा लोन
देश के तीन सबसे बड़े बैंकों के आंकड़ों को देखें तो उनके कुल लोन में से आधे से ज्यादा हिस्सा खुदरा कर्ज का है। एसबीआई, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के लोन बुक में खुदरा लोन की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा है। इसी तरह, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक के लोन बुक में भी खुदरा कजज़् की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत है।
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